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Friday, 26 June 2015

मैं मोहम्मद अनस मुझे अपने मुल्क हिंदुस्तान से मुहब्बत हैं।


मैं मोहम्मद अनस मुझे अपने मुल्क हिंदुस्तान से मुहब्बत हैं। मुहब्बत सिर्फ इसलिए नहीं कि मैं यहाँ पैदा हुआ या मेरे बाप दादा, और न ही इसलिए कि बटवारे के समय हमारे पूर्वजों का पाकिस्तान न जाने की वजह से यही रह जाना बल्कि इसलिए कि जब इस देश में बँटवारे के बाद साम्प्रदायिक दंगे होते हैं तो उसके विरोध में एक हिन्दू महात्मा गाँधी खड़े होते हैं। बाबरी मस्जिद शहीद की जाती हैं तो उसके विरोध में सबसे आगे हिन्दू ही आते हैं (बाबरी मस्जिद एकशन कमेटी में एक भी हिन्दू न होने का अफसोस और विरोध है।) गुजरात में दंगे होते हैं तो विरोध में सबसे आगे हिन्दू ही आते हैं, बचपन में मेरा भाई कैफ नहीं अर्पित होता हैं, मर मिटने का दिल करता है जब रमज़ान में सहरी के समय अमित अपने फोन मे अलार्म लगाता है। और पूरे नवरात्रों और बड़े मंगल के महीनों में मेरा नानवेज न खाना । हां मै प्रसाद खाता हू क्योंकि वह मिठाई ही होती हैं आपके अनुसार गौ मुत्र नहीं। और आप चचा। खजुर खाने से हिन्दू ही रहेंगे मुसलमान नहीं। तो कसम मुझे मेरे मुल्क की इनही सब चीजों को देखकर धार्मिक कट्टरपंथियों से लड़ने और मुल्क से मोहब्बत करने का दिल करता है।  

Thursday, 13 March 2014

बिस्मिल-अशफ़ाक कि दोस्ती



चौरी-चौरा कांड के बाद जब महात्मा गांधी ने अपना असयोग आंदोलन वापस ले लिया था, तब हजारों की संख्या में युवा खुद को धोखे का शिकार समझ रहे थे. अशफ़ाक उल्ला खां उन्हीं में से एक थे. उन्हें लगा अब जल्द से जल्द भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति मिलनी चाहिए. इस उद्देश्य के साथ वह क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के साथ जुड़ गए. आर्य समाज के एक सक्रिय सदस्य और समर्पित हिंदू राम प्रसाद बिस्मिल अन्य धर्मों के लोगों को भी बराबर सम्मान देते थे. वहीं दूसरी ओर एक कट्टर मुसलमान परिवार से संबंधित अशफ़ाक उल्ला खां भी ऐसे ही स्वभाव वाले थे. धर्मों में भिन्नता होने के बावजूद दोनों का मकसद सिर्फ देश को स्वराज दिलवाना ही था. यही कारण है कि जल्द ही अशफ़ाक, राम प्रसाद बिस्मिल के विश्वासपात्र बन गए. धीरे-धीरे इनकी दोस्ती भी गहरी होती गई.

अशफ़ाक़ उल्लाह खां कि शायरी

जाऊंगा खाली हाथ मगर ये दर्द साथ ही जायेगा, जाने किस दिन हिन्दोस्तान आज़ाद वतन कहलायेगा? बिस्मिल हिन्दू हैं कहते हैं “फिर आऊंगा, फिर आऊंगा,फिर आकर के ऐ भारत मां तुझको आज़ाद कराऊंगा”. जी करता है मैं भी कह दूँ पर मजहब से बंध जाता हूँ, मैं मुसलमान हूं पुनर्जन्म की बात नहीं कर पाता हूं; हां खुदा अगर मिल गया कहीं अपनी झोली फैला दूंगा, और जन्नत के बदले उससे यक पुनर्जन्म ही माँगूंगा