जे एन यु की लाइब्रेरी में हुयी छात्रा से छेड़छाड़ का विरोध करना तो सही हैं । दिल से मजम्मत होना चाहिए उम्मीद हैं सभी लोग भी करेंगे, इस घटना की आड़ लेकर जे एन यु और कामरेडों को गरियाना कहाँ तक सही है । ये तो वही बात होगी की ब्लास्ट ओसामा ने किया और भुगतना सारे मुसलमानो को पड़ा किसी एक की गलती का दोष पूरे समाज को देना कहाँ का इन्साफ है। आपका फेमिनिज्म जे एन यु और ए एम यु के मामलो पर ही क्यों जागता हैं । जागिये, लड़िये संघर्ष करिये महिलाओ के अधिकार के लिए क्यूंकि आज भी हमारा समाज पृतसत्ता विचारधारा का गुलाम है । किसी समाज और विचारधारा को गाली देने से बात बढ़ती ही हैं भड़कती ही है हल नहीं निकलता है ।
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